कृष्ण बताते हैं कि यह योग राजऋषियों की परम्परा से आगे बढ़ता रहा — पीढ़ी दर पीढ़ी। लेकिन जैसे कोई पुरानी कहानी बार-बार सुनाने से थोड़ी-थोड़ी बदल जाती है, वैसे ही बहुत समय बीतने पर यह ज्ञान धुंधला पड़ गया और इस धरती पर लुप्त-सा हो गया।
यह श्लोक एक महत्त्वपूर्ण बात कहता है — अच्छा ज्ञान भी यदि संजोया न जाए तो खो जाता है। इसीलिए कृष्ण इसे अर्जुन को फिर से दे रहे हैं — ताकि यह अनमोल ज्ञान आगे चलता रहे।