कृष्ण कहते हैं — जिसके सभी कामों में इच्छा और संकल्प नहीं है, और जिसके कर्म ज्ञान की अग्नि में जल गए हैं — उसे विद्वान लोग पण्डित कहते हैं। पण्डित वह नहीं जो बहुत पढ़ा-लिखा हो, बल्कि वह जिसका मन इच्छाओं से मुक्त हो — जैसे कमल कीचड़ में खिलकर भी उससे अलग रहता है।
ज्ञान की अग्नि कर्मों को जलाती है — यानी ज्ञान होने पर पुराने कर्मों का बोझ कम होता जाता है। ज्ञान शुद्धिकरण का मार्ग है।