📿 श्लोक संग्रह

यस्य सर्वे समारम्भाः

गीता 4.19 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 4 — ज्ञानकर्मसंन्यासयोग
यस्य सर्वे समारम्भाः कामसङ्कल्पवर्जिताः ।
ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पण्डितं बुधाः ॥
यस्य
जिसके
सर्वे
सभी
समारम्भाः
काम, उद्यम
कामसङ्कल्पवर्जिताः
काम और संकल्प से रहित
ज्ञानाग्निदग्धकर्माणम्
जिसके कर्म ज्ञान की अग्नि से जल गए हों
तम्
उसे
आहुः
कहते हैं
पण्डितम्
पण्डित, ज्ञानी
बुधाः
विद्वान लोग

कृष्ण कहते हैं — जिसके सभी कामों में इच्छा और संकल्प नहीं है, और जिसके कर्म ज्ञान की अग्नि में जल गए हैं — उसे विद्वान लोग पण्डित कहते हैं। पण्डित वह नहीं जो बहुत पढ़ा-लिखा हो, बल्कि वह जिसका मन इच्छाओं से मुक्त हो — जैसे कमल कीचड़ में खिलकर भी उससे अलग रहता है।

ज्ञान की अग्नि कर्मों को जलाती है — यानी ज्ञान होने पर पुराने कर्मों का बोझ कम होता जाता है। ज्ञान शुद्धिकरण का मार्ग है।

4.18 में जो 'युक्त' और 'बुद्धिमान' का लक्षण था, वही यहाँ 'पण्डित' के रूप में और स्पष्ट हो जाता है।

अगला श्लोक (4.20) इस स्थिति में रहने वाले व्यक्ति का व्यावहारिक वर्णन करता है।

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