काम कहाँ रहता है? यहाँ बताया — इंद्रियों में, मन में और बुद्धि में। यही तीन उसके घर हैं। इंद्रियाँ विषयों की ओर खिंचती हैं, मन उनमें रमता है, बुद्धि तर्क देकर गलत को सही ठहराती है।
इन तीनों के माध्यम से काम ज्ञान को ढकता है और देही को भ्रमित करता है। यह समझना जरूरी है — शत्रु बाहर नहीं, भीतर है। और वह तीन स्तरों पर कार्य करता है।