अर्जुन के प्रश्न का उत्तर आ गया। वह शक्ति जो बिना चाहे पाप कराती है — वह है काम और क्रोध। काम यानी इच्छा — जो पूरी न हो तो क्रोध बन जाती है।
'महाशनः' — जो सब कुछ खा जाए। काम और क्रोध मनुष्य का विवेक, ज्ञान, शांति — सब नष्ट कर देते हैं। इसीलिए इसे शत्रु कहा गया है — जिसे पहचानना ज़रूरी है।