यह अर्जुन का एक और सुंदर प्रश्न है। वे कहते हैं — मनुष्य चाहता नहीं फिर भी पाप करता है, जैसे किसी ने जबरदस्ती करा दिया हो। यह कौन है? यह अनुभव हर मनुष्य का है।
'अनिच्छन्नपि' — न चाहते हुए भी। यह शब्द बहुत ईमानदार है। जब मनुष्य जानते हुए भी गलत करता है, तो वह भीतर से विभाजित महसूस करता है — अर्जुन का यह प्रश्न उसी का है।