3.31 का विपरीत पक्ष यहाँ है। जो लोग इस शिक्षा पर आक्षेप करते हैं — 'यह ठीक नहीं, यह कैसे हो सकता है' — और पालन नहीं करते, उनकी बुद्धि भ्रमित है।
'सर्वज्ञानविमूढान्' — सभी ज्ञान में भ्रमित। यह कड़ी भाषा है। पर यहाँ कृष्ण यह नहीं कह रहे कि वे बुरे लोग हैं — वे कह रहे हैं कि उनका विवेक काम नहीं कर रहा। आक्षेप की बजाय खुले मन से सुनना जरूरी है।