कृष्ण कहते हैं — इसलिए हे महाबाहु, जिसकी इंद्रियाँ सभी ओर से इंद्रिय-विषयों से संयमित हैं — उसकी प्रज्ञा स्थिर है। यह 2.58 और 2.61 में कही बात का पुनः निष्कर्ष है।
यह पुनरावृत्ति जानबूझकर है। गीता में जो बातें बार-बार आती हैं, वे सबसे महत्वपूर्ण हैं। इंद्रिय-संयम और स्थिर प्रज्ञा — इन दोनों का संबंध कृष्ण को बहुत महत्वपूर्ण लगता है।