अर्जुन ने कृष्ण से पूछा था — स्थितप्रज्ञ (स्थिर बुद्धि वाला) व्यक्ति कैसा होता है? इस श्लोक में कृष्ण उसका उत्तर देते हैं। ऐसा व्यक्ति दुःख आने पर घबराता नहीं और सुख आने पर उसमें डूबता नहीं।
तीन चीज़ें जो उसमें नहीं होतीं — राग (किसी चीज़ से चिपकना), भय (किसी से डरना), और क्रोध (किसी पर गुस्सा)। जो व्यक्ति इन तीनों से मुक्त है, उसे स्थितप्रज्ञ मुनि कहते हैं।
जैसे गहरे समुद्र की तलहटी में लहरें नहीं पहुँचतीं — ऊपर तूफ़ान हो, लहरें उठें, लेकिन नीचे शांति रहती है — वैसे ही स्थितप्रज्ञ व्यक्ति का मन बाहरी परिस्थितियों से विचलित नहीं होता। यह गुण एक दिन में नहीं आता, लेकिन इसका अभ्यास किया जा सकता है।