कृष्ण कहते हैं — जिन महारथियों की दृष्टि में तुम बहुत महान थे, वे समझेंगे कि तुम डर के कारण युद्ध से हट गए। और तुम उनकी दृष्टि में तुच्छ हो जाओगे। यह सामाजिक यथार्थ है।
यह श्लोक बताता है कि जो काम हम डर से छोड़ते हैं, उसे दुनिया डर ही समझती है — चाहे हमारा इरादा कुछ भी हो। बाहर की दुनिया परिणाम देखती है, मन की भावना नहीं।