कृष्ण कहते हैं — तुम्हारे शत्रु बहुत-सी न कहने योग्य बातें कहेंगे और तुम्हारी शक्ति की निंदा करेंगे। इससे बड़ा दुःख और क्या होगा? यह प्रश्न-रूप में दिया गया वाक्य बहुत प्रभावी है।
कृष्ण जानते थे कि अर्जुन एक गौरवान्वित योद्धा हैं। शत्रुओं से निंदा सुनना — यह उनके लिए सबसे बड़ी पीड़ा होगी। कृष्ण इसी बिंदु को छूते हैं ताकि अर्जुन वास्तविकता देखें।