कृष्ण अर्जुन से सीधे कहते हैं — कायरता मत अपनाओ, हे पार्थ, यह तुम्हें शोभा नहीं देती। फिर वे कहते हैं — इस तुच्छ हृदय की कमज़ोरी को छोड़ो और उठ खड़े हो, हे शत्रु-तपाने वाले। यह शब्द कठोर हैं, लेकिन एक गुरु अपने शिष्य से यही कहता है जब वह सही राह भूल जाता है।
कृष्ण यहाँ दो नामों से अर्जुन को बुलाते हैं — 'पार्थ' यानी पृथा (कुंती) का पुत्र, और 'परन्तप' यानी शत्रुओं को संताप देने वाला। ये नाम याद दिलाते हैं कि अर्जुन कौन हैं और उनकी शक्ति क्या है।