अर्जुन कृष्ण से पूछते हैं — हे मधुसूदन, जो भीष्म और द्रोण पूजनीय हैं, उन पर मैं युद्ध में बाण कैसे चला सकता हूँ? यह प्रश्न अर्जुन की नैतिक पीड़ा को दर्शाता है। भीष्म उनके पितामह हैं और द्रोण उनके गुरु — दोनों श्रद्धा के पात्र हैं।
यहाँ अर्जुन की दुविधा वास्तविक है। एक तरफ़ धर्मयुद्ध का कर्तव्य है, दूसरी तरफ़ अपने पूज्यों के प्रति सम्मान। कृष्ण इसी गहरे प्रश्न का उत्तर पूरी गीता में देते हैं।