कृष्ण अर्जुन से पूछते हैं — यह मोह और मलिनता इस कठिन घड़ी में तुम्हारे मन में कहाँ से आई? कृष्ण तीन बातें कहते हैं — यह भाव अनार्यों जैसा है, यह स्वर्ग के योग्य नहीं, और यह अपकीर्ति का कारण बनेगा।
यहाँ कृष्ण कड़ा प्रश्न पूछ रहे हैं — एक दयालु मित्र की तरह नहीं, बल्कि एक गुरु की तरह जो शिष्य की गलती सीधे सामने रखता है। वे अर्जुन को झकझोरना चाहते हैं ताकि वे अपनी असल स्थिति को समझें।