यह श्लोक संजय के मुख से कहा गया है। संजय धृतराष्ट्र को युद्धभूमि का आँखों देखा हाल सुना रहे हैं। वे बताते हैं कि अर्जुन करुणा से भर गए थे — उनकी आँखें आँसुओं से डबडबा आई थीं और वे शोक में डूबे थे। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे ये बात कही।
यह वह क्षण है जब गीता का असली उपदेश शुरू होने वाला है। अर्जुन का यह भाव कोई कमज़ोरी नहीं — वे एक प्रेमी और संवेदनशील मनुष्य हैं। लेकिन कृष्ण जानते हैं कि इस करुणा के पीछे अज्ञान छुपा है, और उसे दूर करना ज़रूरी है।