यह श्लोक आत्मा के स्वरूप का सबसे स्पष्ट वर्णन है। कृष्ण कहते हैं — आत्मा कभी जन्मती नहीं और कभी मरती नहीं। वह पहले नहीं थी ऐसा नहीं, और आगे नहीं होगी ऐसा भी नहीं। वह सदा से है और सदा रहेगी।
चार शब्द आए हैं — अज (जन्मरहित), नित्य (सदा रहने वाली), शाश्वत (अपरिवर्तनीय), और पुराण (अनादि, सबसे पुरानी)। ये चार शब्द मिलकर बता देते हैं कि आत्मा समय की सीमाओं से परे है।
सबसे अंतिम पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है — शरीर के मरने पर भी आत्मा नहीं मरती। जैसे एक मिट्टी का घड़ा टूट जाए तो उसके भीतर का आकाश नहीं टूटता — वैसे ही शरीर के नष्ट होने पर आत्मा वैसी ही रहती है।