भगवान कहते हैं — जो व्यक्ति श्रद्धा से और बिना किसी दोष-दृष्टि के इस गीता को सुने — वह भी मुक्त होकर पुण्यकर्मियों के पवित्र लोक पाता है।
केवल सुनना — पर श्रद्धा से। यह सरल मार्ग है। गीता का पूरा अध्ययन न भी हो, पर यदि श्रद्धा-भाव से एक बार सुनो — वह भी व्यर्थ नहीं जाता।