भगवान कहते हैं — गीता को सुनाने वाले से अधिक प्रिय मुझे मनुष्यों में कोई नहीं — और न होगा। यह प्रेम का परम वचन है।
जो भगवान के ज्ञान को आगे बढ़ाए, वह भगवान का सबसे प्रिय। यह एक गहरी बात है — भक्ति केवल अपने लिए नहीं, दूसरों को भी देना — यही परम-भक्ति का फल है।