भगवान का परम वचन — मन मुझमें लगाओ, मेरे भक्त बनो, मुझे यज्ञ करो, मुझे नमस्कार करो — तुम मुझे ही पाओगे। यह मेरी सत्य प्रतिज्ञा है — तुम मुझे प्रिय हो।
यह चार-भाव भक्ति का सार है — मन, भक्ति, पूजा, प्रणाम। और परिणाम — 'मामेवैष्यसि' — तुम मुझे ही पाओगे। यह गारंटी है। और अंत में 'प्रियोऽसि मे' — तुम प्रिय हो।