भगवान कहते हैं — एक बार और सुनो — यह सबसे परम और गुह्य वचन। क्योंकि तुम मुझे दृढ़ता से प्रिय हो — इसीलिए मैं तुम्हारा हित बताता हूँ।
यह वाक्य बहुत भावुक है। 'इष्टोऽसि मे दृढमिति' — तुम मुझे दृढ़ रूप से प्रिय हो। यह प्रेम का वचन है। भगवान मित्र की तरह बोल रहे हैं।