भगवान कहते हैं — इस प्रकार मैंने तुम्हें गुह्य से भी गुह्यतर ज्ञान कहा। अब इसे पूरी तरह विचारो और जैसा चाहो वैसा करो।
यह भगवान की महानता है — वे थोपते नहीं। सारा ज्ञान दिया, पर निर्णय की स्वतंत्रता अर्जुन को दी। 'यथेच्छसि तथा कुरु' — यह मनुष्य की स्वतंत्र इच्छा का सम्मान है।