भगवान कहते हैं — हे भारत, उसी ईश्वर की शरण जाओ — पूरे मन से, पूरे भाव से। उसकी कृपा से तुम परम शांति और शाश्वत निवास पाओगे।
'सर्वभावेन' — पूरे भाव से। आधे-अधूरे मन से नहीं। यह शरणागति का प्रमुख नियम है। जब हम पूरी तरह समर्पित होते हैं, तभी कृपा का द्वार खुलता है।