भगवान कहते हैं — हे अर्जुन, ईश्वर सब प्राणियों के हृदय में रहता है। वह माया के द्वारा सब प्राणियों को यंत्र पर आरूढ़ की तरह घुमाता है।
यंत्र की उपमा बहुत सटीक है। शरीर एक यंत्र है — और इसमें ईश्वर चालक की तरह बैठा है। हम स्वयं को स्वतंत्र समझते हैं, पर भीतर से ईश्वर ही संचालित करता है।