भगवान कहते हैं — जो सदा सब कर्म करते हुए भी मेरी शरण में रहता है — वह मेरी कृपा से शाश्वत और अविनाशी पद प्राप्त करता है।
यह आश्वासन अद्भुत है — सब कर्म करो, पर मेरी शरण में रहो। यही कर्मयोग और भक्तियोग का संगम है। कर्म नहीं छोड़ना, बस शरण बदल दो।
भगवान कहते हैं — जो सदा सब कर्म करते हुए भी मेरी शरण में रहता है — वह मेरी कृपा से शाश्वत और अविनाशी पद प्राप्त करता है।
यह आश्वासन अद्भुत है — सब कर्म करो, पर मेरी शरण में रहो। यही कर्मयोग और भक्तियोग का संगम है। कर्म नहीं छोड़ना, बस शरण बदल दो।
'मत्प्रसाद' — भगवान की कृपा — यहाँ परिणाम का कारण है। कर्म तो हम करते हैं, पर सिद्धि भगवान की कृपा से मिलती है।
यह श्लोक गीता की 'शरणागति' की शिक्षा का एक और रूप है — सब करते हुए, सब उन्हें अर्पित करते हुए।