क्षत्रिय के स्वाभाविक कर्म हैं — वीरता, प्रताप, दृढ़ता, कुशलता, युद्ध में पीठ न दिखाना, दान और नेतृत्व का भाव। ये सात गुण क्षत्रिय-धर्म के आधार हैं।
यहाँ भी ध्यान देने योग्य है — 'दान' क्षत्रिय के कर्म में भी है। सेवा और दान केवल किसी एक वर्ण की विशेषता नहीं।