अब आसुरी स्वभाव का विस्तृत वर्णन शुरू होता है। भगवान कहते हैं — आसुरी लोगों को न प्रवृत्ति का पता है, न निवृत्ति का। यानी उन्हें यह नहीं मालूम कि क्या करना उचित है और क्या नहीं करना चाहिए।
जब किसी को यह भेद ही न पता हो कि सही क्या है और गलत क्या है, तो वह कैसे अच्छा जीवन जी सकता है? यह अज्ञान ही सबसे बड़ी समस्या है।
ऐसे लोगों में न शौच (शरीर-मन की स्वच्छता) होती है, न सदाचार (अच्छा आचरण), और न सत्य। ये तीनों किसी भी अच्छे जीवन की बुनियाद हैं — और आसुरी व्यक्ति में इनका अभाव होता है।