अब भगवान आसुरी सम्पदा — बुरे गुणों — को बताते हैं। दम्भ — दिखावा करना, जो नहीं हो वह दिखाना। दर्प — धन, रूप या बल का घमंड। अभिमान — "मैं सबसे बड़ा हूँ" ऐसा सोचना।
क्रोध — बात-बात पर गुस्सा करना। पारुष्य — कठोर और कड़वे शब्द बोलना, दूसरों के साथ रूखा व्यवहार। अज्ञान — सत्य-असत्य, धर्म-अधर्म का भेद न जानना।
भगवान कहते हैं — हे अर्जुन! ये छह दोष आसुरी स्वभाव वाले व्यक्ति में होते हैं। जहाँ दैवी गुणों की सूची लम्बी थी, वहाँ आसुरी गुण मात्र छह बताए — क्योंकि ये छह ही काफ़ी हैं व्यक्ति को नीचे गिराने के लिए।