भगवान यहाँ दोनों सम्पदाओं का फल बताते हैं — दैवी गुण मोक्ष दिलाते हैं और आसुरी गुण बन्धन में डालते हैं। यह बहुत सीधी-सादी बात है — अच्छे गुण मुक्ति की ओर ले जाते हैं, बुरे गुण संसार के जाल में फँसाते हैं।
फिर भगवान अर्जुन को सांत्वना देते हैं — "मा शुचः" — शोक मत करो। तुम दैवी सम्पदा लेकर जन्मे हो। यह सुनकर अर्जुन को कितना भरोसा मिला होगा!
हम सब भी अपने भीतर देखें — जिन गुणों की सूची पहले बताई गई, उनमें से कुछ तो हमारे पास भी हैं। बस उन्हें पहचानकर और बढ़ाना है।