भगवान कहते हैं — इस संसार में दो प्रकार के प्राणी हैं: एक दैवी स्वभाव वाले और दूसरे आसुरी स्वभाव वाले। यह विभाजन जाति या वर्ण का नहीं, बल्कि स्वभाव और गुणों का है।
दैवी स्वभाव के बारे में विस्तार से बता दिया गया (श्लोक 1-3 में)। अब भगवान कहते हैं — हे अर्जुन! आसुरी स्वभाव के बारे में मुझसे सुनो।
यहाँ "मे शृणु" (मुझसे सुनो) कहने में भगवान की करुणा झलकती है। वे चाहते हैं कि अर्जुन आसुरी गुणों को पहचान ले ताकि उनसे बच सके।