दैवी गुणों की सूची यहाँ पूरी होती है। तेज — भीतर का आत्मिक बल जो चेहरे पर चमकता है। क्षमा — जो अपराध करे उसे माफ़ कर देना। धृति — कठिन समय में भी धैर्य बनाए रखना।
शौच — शरीर और मन दोनों की स्वच्छता। अद्रोह — किसी के प्रति छल या शत्रुता न रखना। नातिमानिता — अपने बारे में ज़रूरत से ज़्यादा ऊँचा न सोचना।
भगवान कहते हैं — हे अर्जुन! जो व्यक्ति दैवी स्वभाव लेकर जन्मा है, उसमें ये सभी गुण स्वाभाविक रूप से होते हैं। ये गुण जन्म से भी आते हैं और अभ्यास से भी बढ़ाए जा सकते हैं।