यह इस अध्याय का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण श्लोक है। भगवान स्पष्ट कहते हैं — नरक के तीन दरवाज़े हैं: काम (वासना), क्रोध और लोभ। ये तीनों आत्मा का नाश करने वाले हैं।
काम — कभी न तृप्त होने वाली इच्छा। क्रोध — जब इच्छा पूरी न हो तो उत्पन्न होने वाला आक्रोश। लोभ — "और चाहिए, और चाहिए" की अंतहीन भूख। ये तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं — काम से क्रोध आता है, और लोभ काम को बढ़ाता है।
इसलिए भगवान कहते हैं — "तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्" — इन तीनों को छोड़ दो। यह सीधी, स्पष्ट आज्ञा है — कोई पेचीदगी नहीं। बस इन तीनों से बचो और नरक का द्वार बंद हो जाएगा।