पिछले श्लोक में चेतावनी थी, इस श्लोक में आशा है। भगवान कहते हैं — हे अर्जुन! जो मनुष्य इन तीनों अन्धकार के दरवाज़ों (काम, क्रोध, लोभ) से मुक्त हो जाता है, वह अपने कल्याण का आचरण करता है।
"तमोद्वारैः" — भगवान इन्हें "अन्धकार के द्वार" कहते हैं। काम, क्रोध और लोभ — ये तीनों अन्धकार (तमस) में ले जाते हैं। इनसे मुक्त होना प्रकाश की ओर जाना है।
और फिर ऐसा व्यक्ति "परां गतिम्" — परम गति (मोक्ष) को प्राप्त होता है। यह बहुत सकारात्मक संदेश है — समस्या गम्भीर है, पर समाधान सम्भव है। बस इन तीनों को छोड़ो और कल्याण का मार्ग खुल जाएगा।