भगवान कहते हैं — जो व्यक्ति शास्त्र की विधि को छोड़कर अपनी मनमानी करता है, उसे न सिद्धि मिलती है, न सुख, न परम गति (मोक्ष)। तीनों चीज़ें गँवा देता है।
"कामकारतः" — अपनी इच्छा से, मनमाने ढंग से। जैसे कोई बिना नक्शे के अनजान रास्ते पर चल पड़े — वह भटकेगा ही। शास्त्र वह नक्शा है जो हमें सही दिशा दिखाता है।
ध्यान दीजिए — भगवान तीन बार "न" कहते हैं: न सिद्धि, न सुख, न परम गति। यह बहुत कड़ा कथन है। मनमानी का रास्ता कहीं नहीं पहुँचाता — न इस लोक में सुख देता है, न परलोक में।