अब भगवान स्वयं बताते हैं कि ऐसे लोगों का क्या होता है। "तानहम्" — उन लोगों को मैं स्वयं... यह भगवान के मुख से कठोर वचन हैं, पर यह न्याय है, क्रूरता नहीं।
जो लोग द्वेष करने वाले, क्रूर और नराधम (मनुष्यों में सबसे नीच) हैं — उन्हें भगवान बार-बार आसुरी योनियों में डालते हैं। "अजस्रम्" — निरंतर, बार-बार। यह कोई एक बार का दण्ड नहीं — यह चक्र है।
यह समझना जरूरी है कि भगवान किसी से बदला नहीं लेते। यह कर्म का स्वाभाविक फल है — जैसा बोओगे, वैसा काटोगे। आसुरी कर्म करने वाले को आसुरी योनि मिलती है — यह प्रकृति का नियम है।