आसुरी लोग ऐसी कामनाओं का सहारा लेते हैं जो कभी पूरी नहीं होतीं। जैसे समुद्र में कितना भी पानी डालो, वह नहीं भरता — वैसे ही इन लोगों की इच्छाएँ कभी तृप्त नहीं होतीं।
ये लोग दम्भ (दिखावे), मान (अहंकार) और मद (नशे) से भरे होते हैं। मोह के कारण वे गलत सिद्धान्तों को अपना लेते हैं — जैसे "बस यही जीवन है, खाओ-पीओ मौज करो।"
"अशुचिव्रताः" — इनके व्रत (संकल्प) ही अशुद्ध होते हैं। ये जो भी करने की ठानते हैं, वह दूसरों के लिए हानिकारक होता है। इनका पूरा जीवन अपवित्र आचरण पर टिका होता है।