आसुरी लोग अनगिनत चिन्ताओं में डूबे रहते हैं — और ये चिन्ताएँ मरने तक पीछा नहीं छोड़तीं। "अपरिमेयाम्" — जिसका कोई हिसाब नहीं। एक चिन्ता ख़त्म नहीं होती कि दूसरी शुरू।
इन लोगों का जीवन का एकमात्र लक्ष्य है — काम (इच्छाओं) का भोग। वे मानते हैं कि बस यही सब कुछ है — खाना, पीना, भोगना, और कुछ नहीं।
"एतावदिति निश्चिताः" — इन्होंने पक्का मान लिया है कि जीवन का उद्देश्य बस भोग ही है। इससे बड़ा कोई सत्य नहीं — ऐसा इनका अटल विश्वास है। यह सोच ही उन्हें अनन्त चिन्ता में डाल देती है।