पिछले श्लोक में बताई गई आसुरी विचारधारा को अपनाकर ये लोग क्या करते हैं? भगवान कहते हैं — वे अपनी आत्मा खो बैठते हैं, उनकी बुद्धि बहुत संकीर्ण हो जाती है।
ऐसे लोग क्रूर कर्म करने वाले बनते हैं — दूसरों को सताना, शोषण करना, हिंसा करना। और इन सब कर्मों का परिणाम क्या होता है? संसार का विनाश।
"नष्टात्मानः" बहुत गहरा शब्द है — इसका मतलब है कि इन लोगों ने अपनी असली पहचान (आत्मा) खो दी है। जब कोई यह भूल जाता है कि वह आत्मा है, तो वह कुछ भी कर सकता है।