अर्जुन पूछते हैं — हे प्रभु, जो इन तीन गुणों को पार कर चुका है, उसकी पहचान क्या है? उसके लक्षण क्या हैं? वह कैसा आचरण करता है? और कैसे कोई इन तीन गुणों को पार करता है?
अर्जुन के ये तीन प्रश्न बहुत व्यावहारिक हैं — (1) पहचान कैसे करें कि कोई गुणातीत है? (2) उसका व्यवहार कैसा होता है? (3) गुणातीत होने का उपाय क्या है?
यह प्रश्न गीता के दूसरे अध्याय (2.54) में "स्थितप्रज्ञ" के बारे में पूछे गए प्रश्न जैसा ही है। अर्जुन हमेशा व्यावहारिक ज्ञान चाहते हैं — सिर्फ सिद्धान्त नहीं।