भगवान कहते हैं कि जो लोग इस ज्ञान का सहारा लेते हैं, वे मेरे स्वरूप को प्राप्त कर लेते हैं। फिर न तो सृष्टि के समय उनका पुनः जन्म होता है और न ही प्रलय के समय वे दुखी होते हैं।
इसे ऐसे समझो — जब कोई बच्चा तैरना सीख लेता है, तो फिर उसे पानी से डर नहीं लगता। ठीक वैसे ही, जो यह ज्ञान प्राप्त कर लेता है, उसे संसार के जन्म-मृत्यु के चक्र से भय नहीं रहता।
"साधर्म्य" का अर्थ है समान धर्म — अर्थात् ऐसे ज्ञानी भगवान के समान गुणों को प्राप्त कर लेते हैं, जैसे शांति, आनंद और अविनाशित्व।