चौदहवें अध्याय की शुरुआत में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि मैं फिर से तुम्हें वह ज्ञान बताता हूँ जो सब ज्ञानों में सबसे श्रेष्ठ है। यह ज्ञान ऐसा है कि इसे जानकर सभी मुनियों ने परम सिद्धि प्राप्त की।
इसे ऐसे समझो — जैसे किसी बड़े बुजुर्ग के पास बहुत सारी बातें होती हैं, पर एक बात सबसे मूल्यवान होती है जो वे बार-बार दोहराते हैं। भगवान भी यहाँ उसी सबसे मूल्यवान ज्ञान को दोबारा बता रहे हैं — प्रकृति के तीन गुणों का ज्ञान।
"भूयः" (फिर से) शब्द बताता है कि यह ज्ञान पहले भी कहा जा चुका है, पर इसकी महत्ता इतनी है कि इसे विस्तार से समझाना जरूरी है।