भगवान कहते हैं — जब सत्त्वगुण की प्रधानता में शरीरधारी की मृत्यु होती है, तब वह उत्तम ज्ञानियों के निर्मल लोकों को प्राप्त करता है।
इसे ऐसे समझो — मृत्यु के समय मन की जो स्थिति होती है, वही अगले जन्म की दिशा तय करती है। जिसका अंतिम समय शांत, ज्ञानमय और सात्त्विक होता है, वह उत्तम लोकों में जाता है — जैसे ब्रह्मलोक या ऐसे स्थान जहाँ ज्ञानी जन निवास करते हैं।
"अमलान्" (निर्मल) शब्द बताता है कि ये लोक पाप और दुख से मुक्त हैं।