भगवान कहते हैं — रजोगुण की प्रधानता में मरने वाला कर्मासक्त लोगों में जन्म लेता है, और तमोगुण की प्रधानता में मरने वाला मूढ़ योनियों (जिनमें विवेक कम होता है) में जन्म लेता है।
इसे ऐसे समझो — जो व्यक्ति जीवन भर भागदौड़ और इच्छाओं में लगा रहता है, मृत्यु के समय भी उसका मन अधूरे कामों में उलझा रहता है — वह फिर ऐसे ही व्यस्त परिवार में जन्म लेता है। और जो आलस्य, अज्ञान और मोह में डूबा रहता है, उसकी अगली गति और भी जड़ होती है।
पिछले श्लोक में सात्त्विक मृत्यु का शुभ फल बताया गया था। यहाँ राजसी और तामसी मृत्यु के फल बताए गए हैं।