भगवान कहते हैं — जब इस शरीर की सभी इन्द्रियों में प्रकाश (चेतनता, स्पष्टता) और ज्ञान उत्पन्न हो, तब समझना चाहिए कि सत्त्वगुण बढ़ा हुआ है।
इसे ऐसे समझो — जब सुबह उठने पर मन हल्का लगे, सब कुछ साफ दिखे, विचार स्पष्ट हों, आँखों में चमक हो, कानों से सुना हुआ समझ में आए — तो यह सत्त्वगुण की वृद्धि का चिन्ह है। जैसे कमरे में दीपक जलाने से सब स्पष्ट दिखने लगता है, वैसे ही सत्त्वगुण बढ़ने पर मन में प्रकाश फैलता है।
यहाँ "द्वार" का अर्थ शरीर के छिद्र (इन्द्रियाँ) हैं — आँख, कान, नाक आदि। सत्त्व बढ़ने पर सभी इन्द्रियाँ सजग और स्पष्ट होती हैं।