यहाँ कृष्ण कहते हैं — वह क्षेत्र क्या है, कैसा है, उसके कौन-से विकार हैं, वह किससे उत्पन्न हुआ — और वह क्षेत्रज्ञ कौन है, उसका क्या प्रभाव है — यह सब मैं संक्षेप में बताता हूँ, सुनो।
यह श्लोक एक प्रस्तावना है। जैसे कोई बड़ा-बुजुर्ग कहे — 'बैठो, मैं तुम्हें एक-एक बात समझाता हूँ' — उसी तरह कृष्ण यहाँ अर्जुन को तैयार करते हैं।