कृष्ण यहाँ यह बताते हैं कि जो ज्ञान वे देने वाले हैं, वह नया नहीं है। इसे पहले ऋषियों ने अनेक प्रकार से गाया है। अलग-अलग वेद मंत्रों में यह बात कही गई है। और ब्रह्मसूत्र के तर्कपूर्ण पदों में भी यही निश्चित किया गया है।
यह बात मन को आश्वस्त करती है। जैसे दादी कहे — 'यह बात सदा से चली आ रही है, हमारे पुरखे भी यही कहते थे' — वैसे कृष्ण भी कह रहे हैं कि यह ज्ञान बहुत पुराना और परखा हुआ है।