यह श्लोक बहुत महत्वपूर्ण है। भगवान कृष्ण कहते हैं — हर शरीर में जो जाननेवाला है, जो भीतर का साक्षी है — वह मैं हूँ। सिर्फ़ तुम्हारे शरीर में नहीं, सब जीवों के शरीर में।
एक दीपक की लौ जब लाखों दर्पणों में दिखती है, तो हर दर्पण में एक ही प्रकाश है। उसी तरह एक ही चेतन तत्व — परमात्मा — सब प्राणियों में क्षेत्रज्ञ के रूप में विद्यमान है।
और जो इस क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के भेद को समझ लेता है — वही सच्चा ज्ञान है, ऐसा कृष्ण का मत है।