यह श्लोक बहुत कोमल और आश्वस्त करने वाला है। जो लोग ध्यान नहीं कर सकते, जो गहरे दर्शन नहीं जानते — वे भी अगर दूसरों से सुनकर, श्रद्धा से उपासना करें — वे भी मृत्यु से पार हो जाते हैं।
यह उन सबके लिए है जो कहते हैं — 'मुझे तो इतना गहरा पता नहीं।' कृष्ण कह रहे हैं — कोई बात नहीं। जो जानता हो उससे सुनो, श्रद्धा रखो — यही पर्याप्त है।