कृष्ण एक सुंदर निष्कर्ष देते हैं। इस सृष्टि में जो भी जन्म लेता है — चाहे पेड़-पहाड़ हो, चाहे पशु-पक्षी, चाहे मनुष्य — वह सब क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के संयोग से है।
शरीर — क्षेत्र — और उसमें रहने वाली चेतना — क्षेत्रज्ञ — इन दोनों के मिलन से ही कोई भी प्राणी बनता है। यह भेद देखने वाले की आँख खुल जाती है।