ज्ञान के और लक्षण हैं — मुझमें अटल भक्ति, जो कभी न डोले। और एकांत स्थान में रहने की रुचि। जहाँ शोर न हो, भीड़ न हो — वहाँ मन ठीक से सोच सकता है, भीतर उतर सकता है।
भीड़-भाड़ और शोर में अरुचि — यह वैराग्य नहीं है, यह एकाग्रता की ज़रूरत है। एक बड़े लेखक की तरह जिसे अपना काम करने के लिए थोड़ी शांति चाहिए होती है।