अर्जुन कहते हैं — मैं आपको किरीट (मुकुट), गदा और चक्र धारण किए देख रहा हूँ। सब दिशाओं में आपका तेज फैला हुआ है। यह रूप देखना कठिन है — जैसे सीधे सूर्य को देखना कठिन होता है।
अर्जुन 'दुर्निरीक्ष्यम्' — देखने में कठिन — कहते हैं। यह उनकी दिव्य दृष्टि का परीक्षण है। बिना कृपा के यह दर्शन संभव नहीं।