अर्जुन कहते हैं — आप ही परम अविनाशी हैं, जानने योग्य हैं। आप ही इस जगत का परम आधार हैं। आप सनातन धर्म के रक्षक हैं — मेरी समझ में आप ही शाश्वत पुरुष हैं।
यह श्लोक अर्जुन के स्तवन का एक उच्च बिंदु है। 'मतो मे' — मेरी समझ में — यह विनम्रता है। अर्जुन दावा नहीं करते, अनुभव बताते हैं।